FoXDaV schrieb:los jetzt FC Vilnius ..tore müssen her.... [[schwitz]]
klappt doch...bisl meckern und schon 1-0 [[winkewinke]]
FoXDaV schrieb:los jetzt FC Vilnius ..tore müssen her.... [[schwitz]]
Sapphire Sky schrieb:@ BierBaron
Dürfte ich fragen, warum ?? [[nixweiss]]
Sapphire Sky schrieb:@ BierBaron
Dürfte ich fragen, warum ?? [[nixweiss]]
Werderaner1983 schrieb:Sapphire Sky schrieb:@ BierBaron
Dürfte ich fragen, warum ?? [[nixweiss]]
Weil im Oddset-Heftchen keine h2h zu finden sind.... [[bussi]] [[aetsch]] [[grin]]
Idu schrieb:Moss könnte langsam nen tor machen :mrgreen:
Sapphire Sky schrieb:@ BierBaron
In letzteren Fall müsste man ja mit dem Heft "Tipp Mit" immer gewinnen...
Sapphire Sky schrieb:@ BierBaron
Was ist denn übrigens am h2h so entscheidend? Die momentaneForm ist doch entscheidend, nicht die Statistik.
Sapphire Sky schrieb:@ BierBaron
Dann lassen wir uns doch einfach mal überraschen...
Was ist denn übrigens am h2h so entscheidend? Die momentaneForm ist doch entscheidend, nicht die Statistik.
In letzteren Fall müsste man ja mit dem Heft "Tipp Mit" immer gewinnen...
Idu schrieb:moss 2222222.. jackpot is griffbereit.. [[yo]]
FoXDaV schrieb:FoXDaV schrieb:los jetzt FC Vilnius ..tore müssen her.... [[schwitz]]
klappt doch...bisl meckern und schon 1-0 [[winkewinke]]
Werderaner1983 schrieb:Hetman 1-0 FT!!! [[winkewinke]] [[bussi]] [[sabber]] [[yo]] [[stomping]]
Kuba for President!!!!!!! [[bussi]] Meinen allergrößten Respekt und Dank!!!! [[grin]] [[yo]]
[[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]][[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]][[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]][[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]][[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]] [[kuss]]Kuba25 schrieb:Werderaner1983 schrieb:Hetman 1-0 FT!!! [[winkewinke]] [[bussi]] [[sabber]] [[yo]] [[stomping]]
Kuba for President!!!!!!! [[bussi]] Meinen allergrößten Respekt und Dank!!!! [[grin]] [[yo]]
[[yo]] ,immer bookies ärmer machen,ist ja unser aller ziel [[yo]]
Daniel schrieb:Alosnso zum 3. Mal an der gleichen Stelle von der Piste. [[lol]]
Idu schrieb:Moss einer mehr, hoffe die schaukeln das HC -1 durch [[yo]]
HELLTE schrieb:Idu schrieb:Moss einer mehr, hoffe die schaukeln das HC -1 durch [[yo]]
Hoffe ich auch! [[schwitz]]
Kombi mit Haugesund und TPS [[schwitz]]